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विश्व हिंदू परिषद से प्रवीण तोगड़िया बाहर, सदाशिव ने जीता चुनाव

नई दिल्ली : मोदी से तालमेल नहीं बैठ पाने का खामिजाया आखिरकार प्रवीण तोगड़िया को भुगतना पड़ा। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया को बड़ा झटका लगा है। विश्व हिंदू परिषद की नई कार्यकारिणी की घोषणा हो गई है। उनके करीबी राघव रेड्डी विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव हार गए हैं और हिमाचल प्रदेश के पूर्व गवर्नर विष्णु सदाशिव कोकजे को जीत मिली है।

 

वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज भी रह चुके हैं। तोगड़िया और राघव रेड्डी को नई टीम में कोई भी नया दायित्व नहीं मिला है। इसे VHP में तोगड़िया युग का अंत माना जा रहा है। हार के बाद शनिवार शाम में तोगड़िया ने आरोप लगाया कि आज करोड़ों हिंदुओं की आवाज को दबाने का काम हुआ है। उन्होंने कहा कि ‘मैं बड़ी लड़ाई जीतने के लिए आज छोटी हार से गुजर रहा हूं। मैं वीएचपी में 32 साल से था, आज नहीं हूं। मैं हिंदुओं की मांगों को बुलंद करता रहा। मैं आगे भी करोड़ों हिंदुओं, किसानों, युवाओं, मजदूरों की आवाज उठाता रहूंगा।’

इस मौके पर उन्होंने घोषणा की कि वह 17 अप्रैल से अहमदाबाद में अनिश्निचितकालीन उपवास पर बैठने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अनशन किसानों, महिलाओं, मजदूरों की मांगों के लिए होगा। उन्होंने राम मंदिर बनाने की भी प्रतिबद्धता जताई। इसके अलावा गोहत्या, कॉमन सिविल कोड, कश्मीर के हिंदुओं को वापस बसाने की भी बात कही। तोगड़िया ने बताया कि वह किसानों को दोगुना मूल्य दिलाने की मांग करेंगे। बताया जाता है कि पहली बार चुनाव कराने की वजह भी प्रवीण तोगड़िया का वीएचपी पर प्रभाव खत्म करना ही था।

 

दरअसल, केंद्र सरकार और खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई मौकों पर निंदा करने के चलते प्रवीण तोगड़िया से संघ और बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व नाराज चल रहा था। वीएचपी के संविधान के मुताबिक इंटरनैशनल प्रेजिडेंट ही वर्किंग प्रेजिडेंट, वाइस प्रेजिडेंट और जनरल सेक्रटरीज की नियुक्ति करता है। वीएचपी के 54 वर्षों के इतिहास में पहली बार इंटरनैशनल प्रेजिडेंट पद के लिए चुनाव हुए हैं। शनिवार को गुरुग्राम में चुनाव हुआ। माना जा रहा है कि कोकजे को जिम्मेदारी मिलने पर लंबे समय बाद वीएचपी के संगठन में बदलाव देखने को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया दशकों से वीएचपी का चेहरा रहे हैं। उन्हें राघव रेड्डी ने ही यह जिम्मेदारी दी थी। संगठन के भीतर के लोगों का कहना है कि दोनों मिलकर एक दूसरे का समर्थन करते रहे हैं और संगठन पर अपनी मजबूत पकड़ बना रखी थी।

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