breaking news New

सीएम साहब! एक साल से पैसे की राह देख रहे हैं गन्ना किसान

ओमप्रकाश शर्मा

मोदीनगर: अधिक चीनी उत्पादन और मार्केट में अच्छे रेट मिलने के बावजूद मोदी शुगर मिल किसानों का गन्ना मूल्य बकाया भुगतान करने को तेैयार नहीं है। परेशान किसानों की नजर अब सरकार की ओर टिकी है। भाजपा ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में वर्तमान गन्ना पेराई सत्र का भुगतान गन्ना खरीद के 15 दिन के अंदर और पिछले बकाये का संपूर्ण भुगतान तीन महिने में करने का एलान किया था।

सीएम आदित्यनाथ योगी ने पिछले साल 23 अप्रैल तक भुगतान करने का समय दिया था। सीएम ने स्पष्ट कहा था कि भुगतान नहीं करने वाली मिलों को इसके बाद बख्शा नहीं जाएगा। सीएम के आश्वासन को करीब एक वर्ष बीतने को है, मगर मोदी शुगर मिल पर किसानों का भारी भरकम बकाया शेष है। वर्तमान पेराई सत्र शुगर इंडस्ट्रीज के लिए मुफीद रहा है। मार्केट में चीनी का बेहतर रेट है और इस बार चीनी की रिवकरी का भी रिकार्ड टूटा है।

मोदी शुगर मिल में इस बार चीनी की रिकवरी साढ़े बारह तक पुहंच गई जो गत वर्ष मात्र दस से साढ़े दस थी। मोदी शुगर मिल में इस वर्ष अभी तक करीब साठ लाख कुंतल गन्ने की पेराई हो चुकी है जो गर्त वर्ष की अपेक्षा करीब छह लाख कुंतल अधिक है। दूसरे क्षेत्र में इस वर्ष गन्ने का उत्पादन बढऩे से मोदी शुगर मिल के आगामी मई माह के दूसरे सप्ताह तक चलने की उम्मीद है। संभावना जताई जा रही है कि मिल में इस सत्र की गन्ना पेराई बंद होने तक मिल में करीब एक करोड़ लाख कुंतल गन्ने की पेराई हो जाएगी जो गत वर्ष से करीब तीस लाख कुंतल अधिक होगी। मिल मालोमाल लेकिन किसान भुगतान को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।

मोदी शुगर मिल पर किसानों का करीब `150 करोड़ रुपया बकाया है। मिल ने चालू सत्र का केवल एक का माह का ही भुगतान किया है। जबकि मिल इस वर्ष अक्टूबर माह में शुरु हो गई थी। बकाया भुगतान को लेकर गन्ना विभाग द्वारा मिल प्रबंधन व मिल स्वामी उमेश कुमार मोदी के खिलाफ एक बार नहीं दो दो बार कोतवाली में रिपोर्ट तक दर्ज की जा चुकी है, मगर शासन प्रशासन से साठगांठ के चलते उनकी गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं बकाया भुगतान के निकपटारे को लेकर शासन कई बार मिल की संपत्ति नीलामी की तिथियां निर्धारित कर चुका है। मगर स्थानीय प्रशासन नीलामी की बोली का नाटक कर हर बार खरीददारों का अभाव बताकर नीलामी निरस्त करता आ रहा है।

खंजरपुर निवासी किसान नेता बिट्टू खंजरपुर का कहना है कि इस दफा गन्ने की बेहतर रिकवरी के बावजूद भी मिल प्रबंधन किसानों का भुगतान नहीं कर रहा है। बच्चों की पढ़ाई के लिए किताब कापी और विवाह शादियों के लिए पैसे की आवश्यकता है किंतु भुगतान न होने से किसान काफी परेशान है। वह इन खर्चों के लिए उंची ब्याज दर पर साहूकारों से कर्ज लेने को मजबूर है।

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password