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Exclusive! उत्तरांचल से भागे बच्चे, मोदी नगर के डेयरी मालिक ने दी शरण

ओंम प्रकाश शर्मा

मोदीनगर: उत्तरांचल के शहर काशीपुर से तीन दिन पूर्व घर से भागे दो बच्चे सकुशल मोदीनगर में मिले हैं। इन दोनों बच्चों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई सुरेंद्र त्यागी ने। सुरेंद्र त्यागी का अपना डेयरी है। सुरेंद्र त्यागी को ये बच्चे मिलें तो वह उन्हें पहले अपने घर लाए और उसके बाद उन्हें पुलिस के पास ले गए।

दोनों बच्चों की पहचान मोहम्मद आमिर (12) और फरीद के रूप में हुई है। मोहम्मद आमिर ने बताया कि वह जसपुरा में अब्दुल मजीद पब्लिक स्कूल में कक्षा पांचवी का छात्र है। उसी के स्कूल में उसका साथी फरीद पुत्र रिजवान कक्षा चार में पढ़ता है। 17 अप्रैल को आमिर को उसके भाई ने पढ़ाई के लिए डांटा जिससे नाराज होकर वह अगले दिन अपने दोस्त फरीद के साथ घर से भाग निकला।

आमिर के मुताबिक वह लोग एक परिचित के साथ 18 अप्रैल को काशीपुर स्टेशन पहुंचे और वहां से रात दस बजे की ट्रेन पकड़कर दिल्ली के लिए रवाना हो गए। आमिर ने बताया कि दिल्ली पहुंचने पर वे लोग दो दिन तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ही सोये। इस बीच 20 तारीख को उनके साथ आए व्यक्ति की मोदीनगर निवासी एक दंपत्ति से मुलाकात हुई। वह व्यक्ति नगर के एक समाजवादी नेता सुरेंद्र त्यागी की दूध की डेयरी पर नौकरी करता था। शख्स ने सुरेंद्र त्यागी को फोन करके पूछा कि उनके पास एक व्यक्ति और दो बच्चों को काम मिल सकता है क्या?

सुरेंद्र त्यागी ने बताया कि उन्होंने जब इस मामले में बच्चों के साथ आए व्यक्ति से गहराई से पूछताछ की तो उन्हें दाल में कुछ काला नजर आया। बच्चों के साथ आया व्यक्ति थोड़ी ही देर में बहाना करके रेलवे स्टेशन से भाग निकला। उसके बाद बच्चों को लेकर सुरेंद्र की डेयरी पर काम करने वाला शख्स उनके पास पहुंचा। बच्चों को सुरेंद्र त्यागी और उनकी पत्नी ने अपने घर में पनाह दी।

सुरेंद्र त्यागी के मुताबिक वह दोनों बच्चों को लेकर शनिवार को सुबह कोतवाली पुहंचे और पुलिस को स्थिति से अवगत कराया। पुलिस ने काशीपुर अंतर्गत थाना जसपुरा की पुलिस से संपर्क साधा तो उनको पता चला कि गायब बच्चों के माता पिता ने जसपुरा थाने में दोनों बच्चों की गुमशुदगी दर्ज करा रखी है।

थाने में बच्चों के परिजन

बच्चों के परिजन पहुंचे मोदीनगर:

मासूमों के परिजन अपने बच्चों की बरामदगी की सूचना मिलने के बाद मोदीनगर थाने पहुंचे। पुलिस ने मामले में कागजी कार्यवाई करने के बाद बच्चों को परिजनों को सौंप दिया। मामले में बच्चों के परिजनों ने किसी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया। बच्चों के माता-पिता के चेहरे पर बच्चों के सकुशल मिलने की कोई खुशी नजर नहीं दिखी बल्कि बच्चों की करतूत से वे लोग तनाव में दिखाई दिए।