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निवाड़ी की कई बेसहारा वृद्ध-वृद्धाओं का बना राशन कार्ड

मोदी नगर.
भारतीय समाज में बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों पर माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों की सेवा का दायित्व होता है. मां-बाप हजार दुःख और परेशानियां उठाकर अपने बच्चों का पालना-पोषण करते हैं. उन्हें अच्छी शिक्षा देकर काबिल इंसान बनाते हैं. किन्तु वक्त गुजरने के साथ ये बच्चे अपने अभिभावकों को ही भूल जाते हैं. अपने जीवन में इतना खो जाते हैं कि उन्हें अपने माँ-बाप के सूख-दुख की कोई परवाह नहीं रहती है. उम्र के ढलते पड़ाव पर शरीर भी साथ छोड़ने लगता है. ऐसी दशा में उन बुजुर्गों को एक कंधे की तलाश होती है. जो उन्हें दो वक्त की रोटी और उनके नज़रों के सामने रहे.


बहरहाल, आपको आजा ऐसे वाकये से रूबरू कराते हैं, जो बदलते वक्त के नब्ज टटोलती है. गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील स्थिति नगर पंचायत निवाड़ी में कई माताएं हैं, जिन्होंने अपने बेटे-बेटियां को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाने में अपना पूरा जीवन लगा दिया। निवाड़ी की रहने वाली वृद्धा अतरी जाटव के पति अब इस दुनिया में नहीं हैं. वह जैसे-तैसे मोहल्ले में मजदूरी करके पेट पलती हैं. ऐसा ही हाला ओमी प्रजापति का है. ये सांस की मरीज हैं। इनके साथ जगवती, भागमल प्रजापति व रामकटोरी आदि ने अपने पाल्यों के परवरिस में कोई कसर नहीं छोड़ी। किन्तु आज, जब इन लोगों को सहारे की जरूरत है, तब इनके बच्चों ने इनका हाल जानना भी भूल गए हैं.

माई सर्कल टीम के प्रयासों से इन बेसहारा वृद्धाओं का राशन कार्ड बन गया है. इस सुविधा से इन लोगों के जीवन का संघर्ष थोड़ा ही सही कम तो जरूर होगा। भविष्य में पेंशन और अन्य सुविधा मिले ऐसा प्रयास जनप्रतिनिधियों और नागरिकों द्वारा करने की जरूरत है. ये दर्जनभर बेसहारा वृद्धाओं का उदहारण वर्तमान समय में पारिवारिक विघटन और गैर-जिम्मेदारी की असलियत को बयां करा रही है.

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