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लुक्सर जेल के कैदियों ने लगाया किताबों से दिल

दीपक सिंह

ग्रेटर नोएडा। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। इसमें सुधार की हमेशा गुंजाइश बनी रहती है। इसी सोच को आगे बढ़ाने का काम एचसीएल के शिव नादर फाउंडेशन ने किया है। फाउंडेशन ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा के लुक्सर जेल में बंद युवा कैदियों को डिजिटल माध्यम से साक्षर बनाने की पहल की है। उनका उद्देश्य है निरक्षर को साक्षर बनाना है। लोगों को साक्षर बनाने के लिए एक ‘नई किरण’ नाम की किताब से पढ़ाई की जाएगी। डिजिटल माध्यम से चीजों को समझना आसान होता है।

यदि सही मौका दिया जाए तो प्रतिभा में निखार आ ही जाता है। जेल का मकसद कैदी को सजा देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुधारना भी है। इसी उद्देश्य से शिव नादर फाउंडेशन ने कंप्यूटर और लैपटॉप के माध्यम से फाउंडेशन के शिक्षा प्लस कार्यक्रम के तहत जेल में बंद युवा कैदियों, जिनकी उम्र 18 से 23 वर्ष है, उन्हें साक्षर करने का बीड़ा उठाया है।

दिलचस्प यह है कि इन निरक्षर कैदियों को जेल में बंद शिक्षित कैदी ही पढ़ाएंगे। पढ़ाने वाले कैदियों को दो दिन की ट्रेनिंग दी गई है। 40-40 युवा कैदियों की दो क्लास होगी। 90 दिनों तक हर रोज इनकी दो शिफ्ट में दिन में 11 बजे से क्लास लगेगी। इसमें एक घंटे का इंटरवल होगा। निरक्षरता के उन्मूलन के लिए शिव नादर फाउंडेशन के रॉबिन सरकार के सहयोग से साक्षरता कार्यक्रम अब तक गांवों में चलाया जाता रहा है। बीते माह जेल अधीक्षक के अनुरोध पर जेल में बंद युवा निरक्षर कैदियों को साक्षर बनाने का कार्यक्रम शुरू किया गया है।

जेल में साक्षरता अभियान का शुभारंभ करते हुए अतिथिगण।

जेल अधीक्षक विपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि वर्तमान समय में 18 से 23 वर्ष के करीब 100 ऐसे कैदी हैं, जो निरक्षर हैं। शिव नादर फाउंडेशन ने फिल्टर करने के बाद उनमें से 80 से 90 कैदियों का चयन किया है, जिन्हें पहले चरण में साक्षर बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 90 दिनों के इस कार्यक्रम में कैदियों को कक्षा तीन पास माना जाएगा। उन्होंने बताया कि जो निरक्षर कैदी जेल में बंद हैं, निश्चित तौर पर वे गरीब हैं। उनका मकसद सुधार का है। जेल से छूटने के बाद अगर उनके पास अपनी समझ होगी और किताबों का साथ होगा, तो संभव है भविष्य में वे अपने ज्ञान के हिसाब से जीवन बिताएंगे।और अपने व अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकेंगे

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