शनि जयंती पर ऐसे करें आराधना, मिलेगी शनि के कष्टों से मुक्ति

उज्जैन। इस साल शनि जयंती सोमवार 3 जून को सोमवती अमावस्या के दिन मनाई जाएगी। इस दिन शनि संबंधित दान, धर्म और पूजा-पाठ करने से शनि संबंधित पीड़ा का नाश होता है। कुंडली में यदि शनि की स्थिति ठीक नहीं है और व्यक्ति समस्याओं से जूझ रहा है, तो उसे शनि देव की शरण में जाना चाहिए।

किसी इंसान की कुंडली में शनि की स्थिति के अनुसार की महादशा, अंर्तदशा, प्रत्यंतरदशा, साढ़ेसाती और ढ़ैय्या के होने पर इंसान को उसका फल प्राप्त होता है। यह फल अच्छा होगा या बुरा यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति के कार्य पूर्व में कैसे रहे हैं। ज्योतिष में कहा गया है- अवश्यमेव भोक्तव्यं पूर्वं कृतं पापं, यानी पूर्व में किए गए पापों और गलतियों का भुगतान व्यक्ति की जरूर ही भोगना होता है। यदि व्यक्ति सद चरित्र और अच्छे कर्म करने वाला है, तो उसे शुभ फल भी मिलते हैं।

शनि से पीड़ित हैं, तो कभी भी गरीबों, अपने अधिनस्थ कार्य करने वाले लोगों को प्रताड़ित न करें। अपने से छोटे लोगों को इज्जत दें और उनका जीवन बेहतर बनाने के लिए कार्य करें, तो शनि की कृपा जरूर मिलती है।

शनि के निमित्त यह करें दान

शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए शनिवार को शनि मंदिर या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को सरसों का तेल, काला कंबल, काला कपड़ा, लोहे का पात्र, काले तिल काले उड़द, काला छाता, काले चमड़े के चप्पल या जूते, गरीबों को भोजन दान किया जा सकता है। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि दान सुपात्र व्यक्ति को ही करना चाहिए। ऐसे किसी व्यक्ति को दान न करें, जिसे जरूरत ही नहीं है या जिसे उस दान को लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

इसके साथ हनुमानजी की पूजा से भी शनि से संबंधित दोष दूर होते हैं। हनुमाान चालीसा, सुंदरकांड, हनुमान अष्टक, बजरंगबाण का पाठ करने से व्यक्ति को शनि से संबंधित पीड़ा से मुक्ति मिलती है। साथ ही हनुमानजी को चमेली का तेल और सिंदूर लगाने का विधान है। प्रसाद में चने-चिरौंजी, गुड़-चने, नारियल और बूंदी के लड्डू चढ़ाने का प्रावधान है।

शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक लगाने से शनि संबंधित कष्टों से छुटकारा मिलता है। शिवलिंग पर काले तिल मिश्रित जल समर्पित करने से शनि के कष्टों में कमी होती है। साथ ही श्रीकृष्ण आराधना से भी शनि के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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