नीतीश की खरी-खरी, मोदी कैबिनेट में अब कभी नहीं होंगे शामिल

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में घटक दलों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व होना चाहिए। दिल्ली से पटना लौटते ही मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में हम लोग घटक दलों को आनुपातिक ढंग से ही मंत्रिमंडल में शामिल करते हैं। अटलजी के सरकार में भी यही व्यवस्था लागू थी। उस समय भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं था।

हालांकि, अब बात अलग है क्योंकि भाजपा खुद पूर्ण बहुमत में है। मगर, अपनी पार्टी की कोर टीम के साथ विमर्श कर वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि मंत्रिमंडल में सांकेतिक रूप से भागीदारी में जदयू की कोई रुचि नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में वह यह कह रहे हैं कि भविष्य में केंद्रीय कैबिनेट में जदयू के शामिल होने का कोई प्रश्न नहीं है।

गठबंधन में आरंभ में जो बातें होती हैं, वही आखिरी होती है। मंत्रिपरिषद में आनुपातिक या सांकेतिक रूप से घटक दलों की भागीदारी का निर्णय भाजपा को करना था। मुख्यमंत्री ने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न पर कहा कि यह तो सरकार को तय करना है कि आगे वह किस प्रकार से काम करना चाहेगी। उन्होंने कहा कि किसी को इस बात पर भ्रम नहीं होना चाहिए कि सरकार में शामिल होना ही साथ रहने का प्रमाण है।

बिहार में जो चुनावी कैंपेन किया गया, उसमें सभी लोगों ने एक-दूसरे का साथ दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बुलावे पर 29 मई को दिल्ली गए थे। मंत्रिपरिषद के गठन को लेकर हुए विमर्श में हमें यह बताया गया कि भाजपा सांकेतिक रूप से अपने घटक दलों को एक-एक सीट पर प्रतिनिधित्व देना चाहती है। हमारे दल की लोकसभा में 16 और राज्यसभा में छह सीटें हैं।

वैसे भी मंत्रिमंडल में शामिल होने का हम लोगों ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया था। केंद्रीय कैबिनेट में बिहार की हिस्सेदारी के संदर्भ में सामाजिक समीकरण को केंद्र में रख पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। भाजपा की हारी हुई आठ सीटों पर जदयू ने जीत हासिल की। केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कहा कि वह तो आरंभ से यह कहते रहे हैं कि पिछड़े राज्यों के पिछड़ेपन को खत्म करने और महिला सशक्तीकरण की दिशा में विशेष पहल की जानी चाहिए। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, अनुच्छेद-370 जैसे मुद्दे पर उनके दल की राय पहले से सार्वजनिक है।

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