मिशन शक्ति से अंतरिक्ष में फैला अधिकांश कचरा नष्ट, बचा हुआ भी जल्द होगा खत्म

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अध्यक्ष जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि भारत द्वारा 27 मार्च को किए गए मिशन शक्ति परीक्षण से पैदा हुआ अंतरिक्ष में अधिकांश मलबा नष्ट हो चुका है। जो थोड़ा बहुत बचा है वह कुछ वक्त में खत्म हो जाएगा। इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (आईडीएसए) में “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रोद्यौगिकी” विषय पर व्याख्यान के बाद एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात कही।

रेड्डी ने कहा, “जैसा कि मैंने छह अप्रैल को जिक्र किया था कि मलबा कुछ सप्ताह में खत्म हो जाएगा। जो मुझे सूचना मिली है कि उसके अनुसार अधिकांश मलबा नष्ट हो चुका है और जो थोड़े-बहुत टुकड़े बचे हैं वे कुछ समय में खत्म हो जाएंगे।”

डीआरडीओ प्रमुख ने कहा- “सूचनाओं पर निगरानी रखी जा रही है और मुझे नहीं लगता है कि यह कोई चिंता की बात है।” छह अप्रैल को यहां डीआरडीओ भवन में प्रेस कांफ्रेंस में रेड्डी ने कहा था कि भारत ने वैश्विक अंतरिक्ष संपत्तियों को मलबे के खतरे से बचाने के लिए “मिशन शक्ति” केलिए 300 किमी से भी कम की कक्षा को चुना था। विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि निचले वातावरण में परीक्षण किया गया था, ताकि अंतरिक्ष में मलबा नहीं रहे।

रेड्डी ने कहा कि डीआरडीओ मिलने वाले बजट का 25 फीसदी अनुसंधान और विकास पर खर्च करता है। डीआरडीओ चेयरमैन रेड्डी ने कहा कि जहां तक बेसिक रिसर्च और एप्लीकेशन रिसर्च की बात है तो इस पर हम अच्छा-खासा पैसा खर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमतः प्रत्येक प्रयोगशाला के संसाधनों का 20 प्रतिशत भविष्य की प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान सामग्री पर खर्च किया जाना चाहिए।

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