सरकार ने खारिज की वाइस एडमिरल बिमल वर्मा की अपील

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को वाइस एडमिरल बिमल वर्मा की अपील खारिज कर दी। एडमिरल वर्मा ने सरकार पर उनकी अनदेखी करने और उनसे जूनियर अधिकारी को नौसेना प्रमुख बनाने के फैसले पर सवाल उठाया था। रक्षा मंत्रालय के समक्ष यह याचिका 10 अप्रैल को दायर की गई थी। अब इस मामले में 20 मई को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में सुनवाई होगी।

अंडमान और निकोबार में ट्राई सर्विस कमांड के प्रमुख वाइस एडमिरल वर्मा के मुताबिक वह सभी वाइस एडमिरल में सबसे वरिष्ठ हैं। मगर, उन्हें नजरअंदाज करके वाइस एडमिरल करमबीर सिंह को नौसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया गया है। रक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव ऋचा मिश्रा ने स्पष्ट किया कि सेवा प्रमुखों की नियुक्ति में वरिष्ठता एक महत्वपूर्ण मापदंड है, लेकिन यह एकमात्र नहीं है।

इससे पहले हुई नियुक्तियों में भी ऐसा हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि केंद्र सरकार ने नौसेना प्रमुख का चयन बड़ी सावधानी से किया है। सरकार ने वाइस एडमिरल बिमल वर्मा की मेरिट को भी देखा है। चयन को लेकर निरंतर चलने वाले अभ्यास और उसके पैरामीटर पर भी उन्हें परखा है। इसके बाद किए गए मूल्यांकन में वाइस एडमिरल वर्मा को सबसे वरिष्ठ अधिकारी माना गया, लेकिन नौसेना प्रमुख की नियुक्ति के अन्य मानदंडों में वह अनुपयुक्त पाए गए।

ऋचा मिश्रा ने कहा कि सरकार अपने फैसले से संतुष्ट है। कोई असंतोष नहीं है। सरकार ने वाइस एडमिरल करमबीर की नियुक्ति में सभी पक्षों पर विचार करने के बाद ही निर्णय लिया है। 31 मई को वर्तमान नौसेना प्रमुख सुनील लांबा सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनके बाद वाइस एडमिरल करमबीर सिंह अगले नौसेना प्रमुख होंगे। दरअसल, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने कोई भी न्यायिक कदम उठाने से पहले वाइस एडमिरल वर्मा को सरकार से अपील करने को कहा था। न्यायाधिकरण ने सरकार से उनकी अपील पर 15 मई तक फैसला लेने के लिए कहा था।

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