पहली बार चुनाव नतीजे पर विवाद सुलझाने को अवकाशकालीन पीठ गठित, CJI करेंगे अगुवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में इस साल 25 मई से 30 मई तक लगने वाली अवकाशकालीन पीठ का नेतृत्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई करेंगे। देश में ऐसा पहली बार हो रहा है। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम 23 मई को आने वाले हैं। ऐसे में सरकार गठन के दौरान किसी भी प्रकार का विवाद आने पर उसका निपटारा आसानी से हो सके, इसके लिए यह फैसला किया गया है।

बताते चलें कि सातवें और अंतिम चरण की वोटिंग 19 मई को होगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ हर साल ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान लगती है। मगर, प्रधान न्यायाधीश कभी इसकी अध्यक्षता नहीं करते। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब देश के चीफ जस्टिस (सीजेआई) इस खंडपीठ की अध्यक्षता करेंगे। दरअसल, इससे पहले जस्टिस जेएस खेहर ने वर्ष 2017 के ग्रीष्मावकाश में अवकाश पीठ के अलावा पहली बार तीन संविधान पीठ का गठन कर उसका नेतृत्व किया था।

मगर, दो जजों की अवकाश पीठ में वह शामिल नहीं थे। हालांकि, उससे पहले वर्ष 2015 में काम का बोझ कम करने के लिए वह अवकाश बेंच में शामिल हुए थे। पर तब वह सीजेआई नहीं थे। शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी हुई अधिसूचना के अनुसार चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एमआर शाह इस वेकेशन बेंच का हिस्सा होंगे जो 25 से 30 मई तक ही लगेगी।

इस दौरान तत्काल आए अति आवश्यक मामले और सामान्य मामलों की सुनवाई होगी। अधिसूचना के अनुसार डिविजन बेंच 13 मई से 20 मई तक काम करेगी, जिसमें जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस संजीव खन्ना होंगे। वहीं, 21 मई से 24 मई तक जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह इसका हिस्सा होंगे। सुप्रीम कोर्ट में 13 मई से 30 जून तक अवकाश रहेगा और एक जुलाई से सामान्य कामकाज फिर से शुरू होगा।

बताते चलें कि पिछले साल भी मई में सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक विधानसभा का विवाद पहुंचा था। तब वहां पर कोई भी पार्टी बहुमत में नहीं आई थी। इस दौरान राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। इसके खिलाफ कांग्रेस और जनतादल सेक्यूलर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले को जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस अशोक भूषण की खंडपीठ ने सुना था और फ्लोर टेस्ट का आदेश देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को 15 दिन में बहुमत सिद्ध करने का समय दिया था।

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