7 दिन बाद गिरफ्तार हो सकते हैं बंगाल के चर्चित IPS राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक हटाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के IPS अधिकारी राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक हटा ली है। हालांकि अभी 7 दिन तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी। राजीव कुमार को यह राहत किसी कानूनी राहत के लिए सम्बन्धित कोर्ट में अर्जी दायर करने के लिए मिली है। सीबीआई का आरोप है कि राजीव कुमार शारदा घोटाले की जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी कर ही जांच को आगे बढ़ाया जा सकता है।

सीबीआई सूत्रों का कहना है सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखकर ही आगे की कार्यवाही स्पष्ट हो सकेगी कि अभी राजीव कुमार से पूछताछ होगी या 7 दिन के गिरफ्तारी होगी। जाहिर है सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण से पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को झटका लगा है। गौरतलब है कि सातवें चरण में वोटिंग से पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के कई अफसरों का तबादला कर दिया था।

दरअसल, बुधवार को कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड-शो के दौरान हुए बवाल के बाद ही चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया था। यही नहीं, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़ती हिंसा को देख चुनाव प्रचार गुरुवार रात को ही खत्म करने के आदेश भी दिए थे। निर्वाचन आयोग के इस कदम से राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया था। ममता बनर्जी ने इसे पीएम मोदी के इशारे पर उठाया गया कदम बताया था। साथ ही विपक्षी दलों ने भी पीएम समेत चुनाव आयोग पर निशाना साधा था।

शारदा चिटफंड घोटाले से भी जुड़े हैं तार
गौरतलब है कि राजीव कुमार इसके पहले कोलकाता पुलिस के कमिश्नर थे। वह बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खास अफसरों में गिने जाते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले सीबीआई ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद ममता बनर्जी ने 70 घंटों का धरना दिया था। इस प्रकरण में केंद्र सरकार और राज्य सरकार आमने-सामने आ गए थे। इस विवाद के बाद राजीव कुमार को कमिश्नर के पद से हटाकर सीआईडी भेज दिया गया था। राजीव कुमार का नाम शारदा चिटफंड घोटाले में भी आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा इसे हिरासत में लेकर पूछताछ का आदेश नहीं समझें
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस आदेश को सीबीआई को राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ के निर्देश के तौर पर ना देखा जाए। सीबीआई क़ानून के मुताबिक जांच का आगे बढ़ा सकती है।

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