आदतन दुष्कर्मियों के लिए फांसी की सजा को सही : बांबे हाईकोर्ट

मुंबई। बांबे हाई कोर्ट ने सोमवार को सोमवार को आदतन दुष्कर्मियों के लिए फांसी की सजा को सही ठहराया है। अपने अहम फैसले में कहा है कि आदतन दुष्कर्मियों को सख्त सजा दी जा सकती है। बांबे हाई कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की संशोधित धारा 376 (ई) की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया, जिसके तहत बार-बार दुष्कर्म करने वालों आदतन दुष्कर्मियों को उम्र कैद या फांसी की सजा दी जा सकती है। गौरतलब है कि 2012 के निर्भया गैंगरेप मामले के बाद आइपीसी की इस धारा में संशोधन किया गया था।

जस्टिस बीपी धर्माधिकारी और रेवती मोहिते डेरे की खंडपीठ ने साल 2013 में हुए शक्ति मिल गैंगरेप केस के तीन दोषियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया। तीनों ने धारा 376 (ई) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी, जिसके तहत 2014 में सत्र अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। बताते चलें कि सेंट्रल मुंबई में बंद पड़ी शक्ति मिल के परिसर में तीन अपराधियों विजय जाधव, कासिम बंगाली और सलीम अंसारी ने 22 अगस्त 2013 को 22 वर्षीय फोटो जर्नलिस्ट से गैंगरेप किया था।

इससे पहले 31 जुलाई, 2013 को इसी मिल परिसर में तीनों ने 18 साल की एक टेलीफोन ऑपरेटर से भी गैंगरेप किया था। इन तीनों के अलावा इस मामले में अदालत ने सिराज खान को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि एक नाबालिग को सुधार गृह में भेजा था। खंडपीठ ने कहा, ‘हमारा मानना है कि आइपीसी की धारा 376 (ई) से संविधान का उल्लंघन नहीं होता और इसलिए इस मामले में इसे हटाने की जरूरत नहीं है।’

केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत से कहा कि बहुत विचार-विमर्श और चर्चा के बाद कानून में संशोधन किया गया था और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 2013 के जरिए पेश कोई भी प्रावधान असंवैधानिक नहीं था। खंडपीठ के इस फैसले के बाद अब हाई कोर्ट की दूसरी पीठ के सामने दोषियों की दूसरी याचिका पर सुनवाई होगी। इस याचिका में तीनों ने सत्र अदालत के फांसी की सजा देने के फैसले को चुनौती दी है। इनकी सजा को बरकरार रखने के लिए राज्य सरकार ने भी याचिका दायर की है।

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